जीवन में जो चाहो वो ना मिले तो क्या करोगे?

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जीवन में जो चाहो वो ना मिले तो क्या करोगे?

जीवन में जो चाहो वो ना मिले तो क्या करोगे?
तुम घुट घुट कर जियोगे या फिर एक बार हीं मरोगे?


जो चाहो वो ना मिले तो क्या ये हार है?
अगर ऐसा सोचते हो तो ये सोच हीं बेकार है।


ऐसा नहीं कोई जग में जिसे जो चाहा हो सब मिला हो।
ऐसा कोई फल नहीं जो हर डाल पर खिला हो।


तो क्या जिस डाल पर मनचाहे फल नहीं खिलते वो मुर्झा जाते हैं?
ये जीवन है, जीवन में ना मिलना भी बहुत कुछ सुलझा जाते हैं।


जो तुम चाहो जी जान से उसके लिए प्रयास करो।
पर अगर वो ना मिले तो क्यों जीवन को बकवास करो?


जीवन अनमोल है, इसका सम्मान करो।
चाहत नहीं मिले तो भी मत इसका अपमान करो।


जिन्दगी को खुल कर ना जीना हीं तो इसका अपमान है।
जियो तो ऐसे जैसे तुम्हारे साथ हर पल भगवान है।


एक कवि नें मुझसे कहा था।
तु तो वहीं है पहले जहाँ था।


जीवन आगे बढ़ने का नाम है।
जीवन में रोने धोने का क्या काम है।

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