मोटेरा स्टेडियम

नमस्ते ट्रंप इवेंट होने के बाद से हीं मोटेरा स्टेडियम चर्चा में है।


मोटेरा स्टेडियम 110000 लोगों के बैठने की क्षमता के साथ विश्व का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम तथा विश्व का दुसरा सबसे बड़ा स्टेडियम है।


विश्व का सबसे बड़ा स्टेडियम रुंग्राडो मे डे स्टेडियम, Rungrado May  Day Stadium प्योंगयांग, उत्तर कोरिया में है।


इसे सरदार पटेल स्टेडियम के नाम से भी जाना जाता है। इसका आर्किटेक्ट आस्ट्रेलियाई कंपनी पॉपुलस है।


इसके पहले मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड 95000 लोगों के बैठने की क्षमता के साथ विश्व का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम था।


ये स्टेडियम पहली बार 1983 में बन कर तैयार हुआ था जिसमें बहुत घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेले जा चुके हैं।


पहले इसको गुजरात स्टेडियम के नाम से जाना जाता था जिसकी सीटिंग क्षमता 54000 थी।
इसको दोबारा बनवा कर इसकी सीटिंग क्षमता को बढ़ाकर 110000 किया गया, जिससे यह विश्व का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बन गया, तथा इसका नाम सरदार पटेल स्टेडियम किया गया।

कट, कॉपी और पेस्ट के अविष्कारक Larry Tesler नहीं रहे

क्या आप Larry Tesler के बारे में जानते हैं?

नहीं?

आज के ज़माने में कंप्यूटर का उपयोग किसने नहीं किया होगा? अगर किसी ने कंप्यूटर का उपयोग नहीं किया होगा तो काम से काम स्मार्ट फ़ोन का तो अवश्य किया होगा?

आपने कंप्यूटर, लैपटॉप या स्मार्टफोन में कट (Cut), कॉपी (Copy) और पेस्ट (Paste) तो अवश्य किया होगा?

Ctrl+X =Cut, कंप्यूटर कीबोर्ड पर कण्ट्रोल बटन के साथ जब एक्स बटन को प्रेस करते हैं तो कट होता है,

Ctrl+c = Copy, कंप्यूटर कीबोर्ड पर कण्ट्रोल बटन के साथ जब सी बटन को प्रेस करते हैं तब कॉपी होता है तथा

Ctrl+V = Paste। कंप्यूटर कीबोर्ड पर कण्ट्रोल बटन के साथ जब वी बटन को प्रेस करते हैं तब पेस्ट होता है।

क्या आपको पता है इन तीन कंप्यूटर फीचर्स का अविष्कार किसने किया था?


नहीं पता?

इन तीन फीचर्स के साथ ही साथ “Find” और “Replace” और भी बहुत कुछ का अविष्कार किया था Larry Tesler ने।

Larry Tesler

Larry Tesler एक अमेरिकन कंप्यूटर वैज्ञानिक थे जिनका जन्म 24 अप्रैल 1945 को हुआ था। ये Xerox और Apple जैसी बड़ी कंपनियों में काम कर चुके हैं। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढाई करने के बाद Larry Tesler ह्यूमन कंप्यूटर इंटरेक्शन (Human Computer Interaction) के क्षेत्र में काम किया।
Larry Tesler की मृत्यु 17,फरवरी 2020 को हुई।

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस

प्रति वर्ष 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में यूनेस्को द्वारा मनाया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की शुरुआत

यूनेस्को नें 17 नवंबर 1997 को प्रति वर्ष 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने की घोषणा की थी। तब से प्रति वर्ष 21 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है।

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अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस क्यों मनाया जाता है ?

21,फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस बांग्लादेश में भाषा आंदोलन में शहीद हुए लोगों की स्मृति में मनाया जाता है। 9 नवंबर 1998 को कनाडा में रह रहे रफीकुल इस्लाम नें संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्कालीन महासचिव कोफी अन्नान को पत्र लिखकर विश्व की भाषाओं को बचाने का अनुरोध किया। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने का भी अनुरोध किया जिसके लिए 21 फरवरी के दिन के बारे में सलाह दी।

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के पीछे कहानी

जब 1947 में पाकिस्तान स्वतंत्र रूप से भारत से विभाजित हुआ तब बांग्लादेश भी इस्ट पाकिस्तान के रुप में पाकिस्तान के साथ गया। पाकिस्तान नें उर्दू को अपनी राष्ट्रभाषा बनाया जिसके विरोध में बांग्लादेश में प्रदर्शन होने लगे। बांग्लादेश के लोग बांग्ला भाषा को भी उचित सम्मान दिलाना चाहते थे। 21 फरवरी 1952 को ढाका विश्वविद्यालय के छात्रों नें बहुत बड़ा आंदोलन किया। इस आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तान सरकार नें दमनकारी नीति अपनाई तथा प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई जिसमें कई लोग वीर गति को प्राप्त (शहीद) हुए। आखिरकार 1956 में  पाकिस्तान सरकार को बांग्ला को भी आधिकारिक भाषा का दर्जा देना पड़ा। उन्हीं मातृभाषा को सम्मान दिलाने के लिए जान देने वाले लोगों की याद में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का थीम

प्रति वर्ष अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस एक थीम के साथ मनाया जाता है।

2020 – Indigenous Language matter for development, peace building and reconciliation.
2019 – International Year of Indigenous Language

मातृभाषा दिवस के अन्य नाम

मातृभाषा दिवस को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है।
1. टंग डे (Tongue Day)
2. मदर लैंग्वेज डे (Mother Language Day)
3. मदर टंग डे (Mother Tongue Day)
4. लैंग्वेज मूवमेंट डे (Language Movement Day)
5. शहीद दिबोस (Shahid Dibos)

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भारतीय भाषाएं

किसी भी देश में दो तरह की भाषाएं हो सकती हैं।
एक आधिकारिक भाषा और मातृभाषा। भारत में 22 आधिकारिक भाषाएं हैं जिनको भारतीय संविधान के आठवीं अनुसूची में रखा गया है। इसके अलावा हजारों और भाषाएं बोली जाती हैं।

UNESCO

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के बारे में जानने के बाद , इसको मनाए वाली संस्था के बारे में भी जानना आवश्यक है। इसको मानाने वाली संस्था का नाम UNESCO है।

UNESCO – United Nations Educational, Scientific and Cultural Organisation
संयुक्त राष्ट्र संघ की अनुषांगिक संस्था है जिसका मकसद विश्व में शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करना है।
स्थापना  – 4 नवंबर 1946
मुख्यालय – पेरिस
डायरेक्टर जनरल – Audrey Azoulay

ब्रिटिश सरकार में भारतीय

एक समय था जब हमारे प्यारे भारत पर ब्रिटिश राज था और हम अपने हर फैसले के लिए ब्रिटिश राज की तरफ देखते थे। और आज उनके सरकार में हमारे देश के लोगों के बढ़ते वर्चस्व को देख कर बहुत अच्छा लगता है।
इंग्लैंड के बोरिश जाॅन्सन (प्रधानमंत्री) की सरकार में तीन महत्वपूर्ण पदों पर भारतीय लोगों को देखकर गौरव का अनुभव होता है।

ये तीन भारतीय हैं।

  1. प्रीति पटेल (Secretary of State for the Home Department)
  2. आलोक शर्मा (International Development Secretary)
  3. ऋषि सुनाक (Finance Minister)

इन तीन भारतीय लोगों के बारे में जानने के पहले ब्रिटेन के बारे में जानना आवश्यक है।

ब्रिटेन

ब्रिटेन युरोप में स्थित एक देश है जो कि इंग्लैंड,  स्कॉटलैंड, वेल्स तथा नॉर्दर्न आयरलैंड को मिलाकर बना है जिसको युनाइटेड किंगडम आॅफ ग्रेट ब्रिटेन एंड नॉर्दर्न आइलैंड या युनाइटेड किंगडम या ब्रिटेन के नाम से भी जानते हैं।

ग्रेट ब्रिटेन एक एकल संसदीय गणराज्य तथा संवैधानिक राजतंत्र (Unitary parliamentary constitutional monarchy) है जिसमें सम्राट या साम्राज्ञी का शासन, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में चुनी हुई संसदीय सरकार के सलाह पर चलता है।

आज ब्रिटेन में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय हैं जो कि 1952 से शासन में हैं तथा विश्व के सबसे लम्बे समय तक रहने वाली राष्ट्राध्यक्ष बनाता है  तथा बोरिश जाॅन्सन प्रधानमंत्री हैं।
ब्रिटेन के संसद दो सदनों का है जिसका नाम पार्लियामेंट (Parliament) है। इसके उच्च सदन का नाम हाउस आॅफ लाॅर्ड्स (House of Lords) तथा निम्न सदन का नाम हाउस आॅफ कौमान्स (House of Commons)है।

अब भारतीय मूल के तीन महत्वपूर्ण व्यक्ति के बारे में

ऋषि सुनाक

ऋषि सुनाक भारतीय मुल के व्यक्ति हैं जिन्हें ब्रिटेन के बोरिश जाॅन्सन की सरकार में वित्त मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व दिया गया है।
ऋषि सुनाक भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस के को फाउंडर एन आर नारायण मूर्ति के दामाद भी हैं जिनका जन्म ब्रिटेन के हैम्पशायर में हुआ था तथा ये रिचमंड के सांसद हैं।
इसके पहले 2015 से ये चीफ सेक्रेटरी टु द ट्रेजरी थे।

आलोक शर्मा

आलोक शर्मा भारतीय मुल के ब्रिटिश राजनेता हैं जिन्हें बोरिश जाॅन्सन की सरकार में सेक्रेटरी आॅफ स्टेट फॉर बीजिनेस, एनर्जी एंड इंडस्ट्रियल स्ट्रेटजी (Secretary of State for Business, Energy and Industrial Strategy)जैसा महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व दिया गया है। इसके पहले ये सेक्रेटरी आॅफ स्टेट फाॅर इंटरनेशनल डेवलपमेंट, हाउसिंग मिनिस्टर तथा एम्पलाॅयमेंट मिनिस्टर का पदभार संभाल चुके हैं। 2010 में रीडिंग वेस्ट से ये कंजरवेटिव पार्टी के लिए सांसद चुने गए थे। इनका जन्म आगरा में हुआ था।

प्रीति पटेल

प्रीति सुशील पटेल 29 मार्च 1972 में जन्मी भारतीय मुल की ब्रिटिश राजनेता हैं जिन्हें बोरिश जाॅन्सन की सरकार में सेक्रेटरी आॅफ स्टेट फॉर द होम डिपार्टमेंट जैसा महत्वपूर्ण भूमिका के लिए चुना गया है। 2010 से ये विथम सीट से कंजरवेटिव पार्टी के सांसद हैं। इसके पहले ये सेक्रेटरी आॅफ स्टेट फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट तथा मिनिस्टर आॅफ स्टेट फाॅर एम्पलाॅयमेंट के पद भी संभाल चुकी हैं।

Interesting Story behind our Republic Day

क्या आपको पता है की हम 26 जनवरी को ही अपना गणतंत्र दिवस क्यों मनाते हैं ?

हम सबको पता है की हम 15 अगस्त 1947 को बहुत आंदोलनों और बलिदानो के बाद अंग्रेजी शाशन से स्वतंत्र हुए थे इसलिए प्रति वर्ष 15 अगस्त को हम अपना स्वतंत्रता दिवस मनाते है। हमें ये भी पता है हम प्रति वर्ष 26 जनवरी को अपना गणतंत्र दिवस मनाते हैं।

हम २६ जनवरी को ही अपना गणतंत्र दिवस क्यों मनाते हैं ? क्योंकि हमने अपने संविधान को 26 जनवरी 1950 को देश में लागु करके देश को गणतंत्र बनाया था।

पर  हमने अपने  संविधान को लागु करने  की तिथि  को 26 जनवरी को ही क्यों चुना ? जबकि  हमारा संविधान 26 नवंबर  1949 को ही बनकर तैयार हो  गया  था और हमारी संविधान सभा  ने  उसे  स्वीकार  भी  उसी  दिन कर  लिया  था।  फिर  हमने उसे  लागु करने  के लिए 26 जनवरी तक प्रतीक्षा क्यों  की ? इसके पीछे एक बहुत  ही  रोचक  कहानी है।

हमारे  गणतंत्र दिवस के पीछे  की कहानी

19 जनवरी 1929 को भारतीय  राष्ट्रीय  कांग्रेस  ने  अपने  लाहौर अधिवेशन  में एक घोषणा   पत्र जारी  किया  जिसमे पूर्ण  स्वराज अथवा Declaration of the Independence of India की घोषणा  की गयी।  उस दिन कांग्रेस  ने  भारत  के  लिए ब्रिटिश शाशन  से पूर्ण  स्वराज  की घोषणा की।
31 दिसंबर 1929 को जवाहर लाल  नेहरू  ने  लाहौर के  रावी   नदी  के तट पर  तिरंगा लहराया और लोगो से 26 जनवरी को स्वतंत्रता  दिवस मनाने  की अपील की। उस दिन  पुरे  देश  में तिरंगे  लहराए  गए।  
जब हमारा देश 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ  तब  से  हम प्रति वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने  लगे। उसके बाद 26 जनवरी को गणतंत्र  दिवस के रूप  में  मानाने  का  निर्णय  लिया। और  उसी  दिन   हमने अपने  संविधान  को  देश  में  लागु कर देश को गणतंत्र घोषित कर  दिया। तब  से  हम प्रति वर्ष 26 जनवरी को  गणतंत्र  दिवस के रूप  में मनाते आ रहे हैं। 

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Non Indian Who got Bharat Ratna

भारत रत्न (Bharat Ratna), भारत गणराज्य का सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार है जो किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदान किया जाता है। अब तक कुल 48 लोगों को भारत रत्न से सम्मानित किया जा चूका है जिसमे 2 गैर भारतीय हैं। जिनके नाम हैं।

  1. खान अब्दुल गफ्फार खान (1987)
  2. नेल्सन मंडेला (1992)

खान अब्दुल गफ्फार खान

खान अब्दुल गफ्फार खान पाकिस्तान (जो पहले भारत ही था ) के स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्हे उनके महात्मा गाँधी के सिद्धांतो के आधार पर भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में अहिंसक आंदोलन के लिए सीमांत गाँधी भी कहा जाता है।

इनको फख्र ए अफगान , बादशाह खान तथा बच्चा खान के नाम से भी जाना जाता है।

ये पहले गैर भारतीय हैं जिन्हे 1987 में भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
इनका जन्म 6 फरवरी 1890 को तथा मृत्यु 20 जनवरी 1988 को हुई थी।1929 में  इन्होने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में खुदाई खिदमतगार (Servants of God) अभियान चलाया जिसने ब्रिटिश राज की कमर तोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई।
ये भारत विभाजन के बहुत बड़े विरोधी थे।
अमेरिका में प्रकाशित चिल्ड्रेन्स बुक (Childrens Book) में इन्हे विश्व के 26 इंसान जिन्होंने दुनिया में बदलाव लाया है, में जगह मिली।
दिल्ली में खान मार्किट और दिल्ली में ही करोल बाग में स्थित गफ्फार मार्किट का नाम इनके ही सम्मान में दिया गया है। तथा मुंबई में इनके नाम से खान अब्दुल गफ्फार खान रोड है। 

नेल्सन मंडेला 

नेल्सन मंडेला दक्षिण अफ्रीका के पहले काले तथा पूरी तरह से लोकतान्त्रिक प्रक्रिया से निर्वाचित राष्ट्रपति थे। ये दक्षिण अफ्रीका के राजनैतिक नेता तथा मानवतावादी नेता थे जो 1994 से 1999 तक राष्ट्रपति रहे। इनका जन्म 18 जुलाई 1918 को तथा मृत्यु 5 दिसंबर 2013 को हुई। इनके जीवन पर महात्मा गाँधी के विचारो का बहुत प्रभाव था। इन्हे दक्षिण अफ्रीका में प्यार से मदीबा या राष्ट्रपिता भी कहा जाता है।
नेल्सन मंडेला 1991 से 1997 तक अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका में भेदभाव  पूर्ण ब्रिटिश शाशन के खिलाफ आंदोलन के लिए इन्हे कई बार गिरफ्तार किया गया तथा अपने जीवन के 27 साल इन्होने कैद में गुजारे।

अंतररष्ट्रीय स्तर पर भूमिका

गुट निरपेक्ष आंदोलन में (1998-1999) (Non Align Movement) ये सेक्रेटरी जनरल की भूमिका भी निभा चुके हैं।
 Pan Am Flight 103 bombing Trial में ये मध्यस्थ की भूमिका भी निभा चुके हैं। 1994 से 1999 तक राष्ट्रपति रहने के बाद ये दूसरी बार राष्ट्रपति बनने से खुद ही इंकार कर दिए।
नेल्सन मंडेला चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से गरीबी उन्मूलन और एच आई वी एड्स उन्मूलन के लिए काम किया है तथा आज भी ये संस्था करती है।

नेल्सन मॉडेला को मिले सम्मान

नेल्सन मंडेला को कुल 250 सम्मान मिल चुके हैं जिनमे से कुछ प्रमुख हैं।

  1. नोबेल पुरस्कार (शांति के लिए ) 1993
  2. US Presidential Medal of Freedom
  3. Soviet Union Lenin Peace prize
  4. Libyan Al Gadaffi International Prize fro Human Rights
  5. 1990 में भारत रत्न
  6. 1992 में निशन ऐ पाकिस्तान
  7. 1992 टर्की का अतातुर्क शांति पुरस्कार जिसको की इन्होने टर्की द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन किये जाने को लेकर, अस्वीकार कर दिया था पर बाद में 1999 में इसे स्वीकार कर लिया।  इन्हे Order of Isabella the Catholic तथा order of Canada भी नियुक्त किया गया। ये सबसे कम उम्र के जीवित व्यक्ति थे  जिन्हे Honorary Canadian Citizen बनाया गया।

इनकी जीवनियाँ

इनकी पहली जीवनी Merry Benson द्वारा लिखी गयी थी।
बाद में दो और जीवनियाँ प्रकाशित हुई जिसमे से एक  Fatima Meer द्वारा लिखी गयी Higher Than Hope तथा दूसरी Anthony Sampson द्वारा लिखी हुई जो 1999 में प्रकाशित हुई।  

नोट
मदर टेरेसा को भी भारत रत्न तथा नोबेल शांति पुरस्कार मिल चूका है पर ये अल्बानिया मूल की भारतीय नागरिक थी। इनकी गिनती गैर भारतीयों में करना उचित नहीं रहेगा।

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Women, awarded Bharat Ratna

भारत रत्न (Bharat Ratna), भारत गणराज्य का सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार है जो किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदान किया जाता है। अब तक कुल 48 लोगों को भारत रत्न से सम्मानित किया जा चूका है जिसमे से केवल 5 महिलाएं हैं। ये 5 हैं।

1 . इंदिरा गाँधी
2. मदर टेरेसा
3. अरुणा आसफ अली
4. एम एस सुबुलक्ष्मी
5. लता मंगेशकर

भारत रत्न के कुछ रोचक तथ्य http://www.nairahein.com/interesting-facts-of-bharat-ratna/

इंदिरा गाँधी

इंदिरा गाँधी भारत की प्रथम एवं एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रही हैं। इनका जन्म 19 नवंबर 1917 को तथा मृत्यु 31 दिसंबर 1984 को हुआ था। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की बेटी हैं।

प्रधानमंत्री रहते हुए इन्हे बहुत आलोचनाओं को भी झेलना पड़ा तथा बहुत सारे उपलब्धियां भी हासिल की।

इनकी सबसे बड़ी उपलब्धि बांग्लादेश की स्वतंत्रता में योगदान है। ये 1966 में पहली बार प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हुई और 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के बाद बांग्लादेश स्वतंत्र हुआ।
1972 में इन्हे भारत रत्न से सम्मानित किया गया।  

मदर टेरेसा


मदर टेरेसा को 1980 में उनके निश्वार्थ सेवा के लिए भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

ये प्रथम भारतीय महिला हैं जिन्हे नोबेल पुरस्कार भी मिला है।
इनका जन्म 26 अगस्त 1910 तथा मृत्यु 5 सितम्बर 1997 को हुई थी।
1950 में इन्होने मिशनरी ऑफ़ चैरिटी की स्थापना कोलकाता में की थी।
इनको 1962 में रेमैन मैग्ससे पुरस्कार तथा 1979 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

नोबेल पुरस्कार के शुरुआत की कहानी http://www.nairahein.com/story-behind-starting-of-nobel-prize/


भारतीय जिन्हे नोबेल पुरस्कार मिला http://www.nairahein.com/indians-indian-origins-won-nobel-prize/

अरुणा आसफ अली

अरुणा आसफ अली एक स्वतंत्रता सेनानी थी जिन्होंने 1942 के महात्मा गाँधी द्वारा शुरू किये गए भारत छोडो आंदोलन में मुंबई के गोवलिया टैंक मैदान में तिरंगा लहराया था।
ये दिल्ली की प्रथम मेयर रह चुकी हैं। इनका जन्म 16 जुलाई 1909 को कालका आज के हरयाणा में हुआ था तथा इनका असली नाम अरुणा गांगुली था। इनकी मृत्यु 29 जुलाई 1966 को हुई।

इनको मिले पुरस्कार

भारत रत्न के साथ साथ इन्हे और कई सम्मान मिल चूका है। जैसे
अंतर्राष्ट्रीय लेनिन शांति पुरस्कार
(Awards International Lenin Peace Prize (1964))
Jawaharlal Nehru Prize (1991)
पद्मा विभूषण  (1992)
इन्हे 1997 में मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
 

All India Minorities Front प्रत्येक वर्षा इनके नाम से डॉ अरुणा आसफ अली सद्भावना पुरस्कार प्रदान करता है। 

एम एस सुबुलक्ष्मी

एम एस सुबुलक्ष्मी कार्नाटिक म्यूजिक के क्षेत्र में बहुत बड़ी हस्ती हैं जिन्हे 1998 में भारत रत्न प्रदान किया गया।

ये म्यूजिक के क्षेत्र में भारत रत्न प्राप्त करने वाली प्रथम शख्सियत हैं।
ये भारतीय संगीत से जुडी पहली हस्ती हैं जिन्हे रेमन मैग्ससे पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चूका है।
ये प्रथम भारतीय महिला हैं जिन्होंने 1966 में संयुक्त राष्ट्र General Assembly में प्रस्तुति दी हैं।
इनका पूरा नाम Madurai Shanmukhavadivu Subbulakshmi तथा इनका जन्म 16 सितम्बर 1916 तथा मृत्यु 11 दिसंबर 2004 को हुई थी।

एम एस सुबुलक्ष्मी मिले पुरस्कार

एम एस सुबुलक्ष्मी को भारत रत्न के अलावा बहुत पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चूका है जिनमे  से प्रमुख
पद्म भूषण (1954 )
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1966 )
संगीत कलानिधि (1968 )
रेमन मैग्ससे पुरस्कार (1974 )
पद्म विभूषण (1975 )
कालिदास सम्मान (1988 )

लता मंगेशकर

करीब 30 भाषा में हजारो गांव को गाने वाली, स्वर कोकिला लता मंगेशकर को 2001 में भारत गणराज्य के सबसे बड़े पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
1942 में मराठी और हिंदी फिल्मो से शुरुआत करके अपना प्रथम हिंदी फिल्म के लिए गाना 1954 में फिल्म गजाभाऊ के लिए रिकॉर्ड किया।
लता मंगेशकर का जन्म 28 सितम्बर 1929 को।

 लता मंगेशकर को मिले पुरस्कार


इन्हे दादा साहब फाल्के पुरस्कार (1989 ) से भी सम्मानित किया जा चूका है तथा इन्हे फ्रांस की सरकार ने 2007 में अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार Officer of the Legion of Honour से भी सम्मानित किया है।

Interesting facts of Bharat Ratna

भारत रत्न (Bharat Ratna), भारत गणराज्य का सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार है जो किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रदान किया जाता है।

इसकी स्थापना 2 जनवरी 1954 को तत्कालीन भारतीय राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा  हुई थी।


पहले इसे केवल कला, साहित्य, विज्ञान और पब्लिक सर्विस के लिए प्रदान किया जाता था। पर दिसम्बर 2011 में भारत सरकार नें इसे ” मानव प्रयास के किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन” के लिए कर दिया।


एक बार में अधिकतम तीन लोगों को भारत रत्न दिया जा सकता है। जिसे प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रपति को सिफारिश किया जाता है।

भारत रत्न पुरस्कार प्राप्त करने वाले को राष्ट्रपति द्वारा एक पीपल के पत्ते के आकार का मेडल प्रदान किया जाता है जिस पर सुर्य का चित्र  होता है तथा उस पर “भारत रत्न ” लिखा होता है . और उस  पर  राष्ट्रपति का हस्ताक्षर होता है। उसके दूसरे साइड पर ” सत्यमेव जयते ” भी लिखा होता है।  ये सब कुछ देवनागरी लिपि में लिखी होती है।

इसके  साथ किसी तरह का मोनेटरी लाभ नहीं होता।


भारत रत्न पुरस्कार प्राप्त व्यक्ति भारतीय वरीयता क्रम में सातवें स्थान पर होता है।

भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित प्रथम व्यक्ति

सबसे पहले भारत रत्न 1954 में तीन लोगो को एक साथ दिया गया था।
1. चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ( स्वतंत्र भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल )
2. डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन ( भारत के प्रथम उपरष्ट्रपति, जिनके जन्मदिन 5 सितम्बर के दिन शिस्क्षाक दिवस के रूप में मनाया जाता है। )
3. सी वी रमन (प्रथम एशियाई एवं  भारतीय वैज्ञानिक जिन्हे विज्ञान (फिजिक्स) के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

अब तक कुल 48 लोगों को भारत रत्न से सम्मानित किया जा चूका है जिसमे से 16 को मरणोपरांत दिया गया है।
पहले मरणोपरांत भारत रत्न देने का प्रावधान नहीं था, 1955 में संशोधन द्वारा इसे जोड़ा गया।

लाल बहादुर शास्त्री प्रथम व्यक्ति थे जिन्हे मरणोपरांत भारत रत्न दिया गया।
2014 में सचिन तेंदुलकर सबसे काम उम्र के व्यक्ति बने जिन्हे भारत रत्न प्रदान किया गया।  इन्हे 40 साल की उम्र में भारत रत्न प्रदान किया गया।
उसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता धोंडो केशव कार्वे को उनके 100 वे वर्ष में भारत रत्न प्रदान किया गया।

गैर भारतीय भारत रत्न

अब तक तीन गैर भारतीय को भारत रत्न से सम्मानित किया जा चूका है।
1. मदर टेरेसा ( ये अल्बानिया मूल की भारतीय महिला हैं जिन्हे शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चूका है। )
2. खान अब्दुल गफ्फार खान ( पाकिस्तान मूल के जिन्हे सीमांत गाँधी भी कहा जाता है )
3. नेल्सन मंडेला (दक्षिण अफ्रीका के प्रथम राष्ट्रपति )

भारत रत्न का स्थगन

दो बार भारत रत्न को ससपेंड किया गया है। पहली बार 1977 से 1980 के बीच एवं दूसरी बार अगस्त 1992 से दिसंबर 1995 के बीच।

भारत रत्न को लेकर विवाद

भारत रत्न के साथ कई बार विवाद हुए हैं, पर दो विवाद बहुत महत्वपूर्ण हैं।


1. सुभाष चंद्र बोस (नेता जी ) को जब 23 जनवरी 1992 (नेता जी सुभाष चंद्र बोस की जयंती ) को मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान करने की घोषणा हुई तब बहुत आलोचनाओं के साथ कोलकाता उच्च न्यायालय में इसको वापस लेने के लिए एक पी आई एल फाइल किया गया ये कहते हुए की नेता जी को मरणोपरांत भारत रत्न नहीं प्रदान किया जा सकता क्योंकि अब तक भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर 18 अगस्त 1945 को उनकी मृत्यु को स्वीकार नहीं किया है।

ये भी पढ़ें नेता जी सुभाष चंद्र बोस के जीवन की प्रेरक कहानी http://www.nairahein.com/great-inspirational-story-from-life-of-neta-ji-subhash-chandra-bose/

2. 1992 में दो पी आई एल , एक केरल उच्च न्यायालय में बालाजी राघवन द्वारा तथा दूसरा मध्य प्रदेश उच्च न्यायलय के इंदौर बेंच में सत्य पल आनंद के द्वारा फाइल किया गया, संविधान के अनुच्छेद 18(1) का हवाला देते हुए की ये अनुच्छेद किसी भी प्रकार के उपाधि को प्रतिबंधित करता है , इसलिए भारत रत्न की उपाधि असंवैधानिक है। पर सुप्रीम कोर्ट ने इसे ख़ारिज कर दिया तथा भारत रत्न को बरक़रार रखा।

भारतीय या भारतीय मूल के व्यक्ति जिन्हे नोबेल पुरस्कार मिला

जब भी दुनिया के बड़े पुरस्कारों की बात होगी तो उसमे नोबेल पुरस्कार का नाम अग्रणी रहेगा। हर वर्ष फिजिक्स, केमिस्ट्री,मेडिसिन , साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए दिया जाता है।

नोबेल पुरस्कार के पीछे व्यक्ति

Alfred nobel

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नोबेल पुरस्कार की शुरुआत 1901 में हुई थी तथा अब तक  कुल 904 लोगो को प्रदान  किया जा चूका है, जिसमे 852 पुरुष एवं 52 महिलाये हैं। साथ ही साथ 1901 से 2018 तक कुल 24 संस्थाओं को भी नोबेल पुरस्कार प्रदान किया जा चूका है।

 

भारतीय जिन्हे नोबेल पुरस्कार प्रदान किया जा चूका है।

कुल नोबेल पुरस्कार विजेताओं में से13 भारतीय या भारतीय मूल के व्यक्ति रह चुके हैं।

 


भारतीय लोगो को मिले नोबेल पुरस्कार के कुछ रोचक तथ्य


रविंद्र नाथ टैगोर प्रथम एशियाई तथा भारतीय थे जिन्हे नोबेल पुरस्कार (साहित्य के क्षेत्र में )मिला है।


मदर टेरेसा एकमात्र भारतीय महिला (अल्बनियाई मूल की ) हैं जिन्हे नोबेल पुरस्कार (शांति के लिए ) मिला है।


दो भारतीय लोगो को नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है पर दुर्भाग्यवश उन्हें नोबेल पुरस्कार मिल नहीं सका है।

1. श्री अरबिंदो – भारतीय कवि, दार्शनिक, राष्ट्रवादी तथा इंटीग्रल योग के जनक।
    इन्हे दो बार नामांकित किया गया, पहली बार 1943 में साहित्य (Literature) के लिए एवं दूसरी बार 1950 में शांति (Peace) के लिए।


2. महात्मा गाँधी – महात्मा गाँधी को 5 बार (1937, 1938, 1939, 1947 और 1948)नोबेल पुरस्कार(Nobel Prize) के लिए नामांकित किया जा चूका है , जिसमे हर बार शांति के लिए ही किया गया है।


ये 1 दिसंबर 1999 में नार्वेजियन नोबेल समिति (Norwegian Nobel Committee)ने कन्फर्म किया है।


नार्वेजियन नोबेल समिति के सेक्रेटरी गैर लुंड्स्टड (Geir Lundestad) ने इस बात को स्वीकार किया की महात्मा गाँधी को नोबेल पुरस्कार न देना नोबेल पुरस्कार के 106 साल के इतिहास की सबसे बड़ी भूल और त्रासदी है।

जिन भारतीयों ने नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया

1. रविंद्र नाथ टैगोर

रविंद्र नाथ टैगोर को हम गुरुदेव, कबिगुरु या विश्वगुरु रविंद्र नाथ टैगोर के नाम से भी जानते हैं।


रविंद्र नाथ टैगोर प्रथम एशियाई तथा भारतीय थे जिन्हे नोबेल पुरस्कार (साहित्य के क्षेत्र में )मिला है।


इन्हे 1913 में इनकी रचना गीतांजलि के लिए साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।


रविंद्र नाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 तथा मृत्यु 7 अगस्त 1941 को हुई थी।
रविंद्र नाथ टैगोर की महान रचनाएँ
1. गीतांजलि
2. गोरा
3. घरे बैरे


रविंद्र नाथ टैगोर ने दो देशो के राष्ट्रगान लिखा है तथा एक देश का राष्ट्रगान इनसे प्रेरित है।
भारत – जन गण मन
बांग्लादेश – आमार सोनार बांग्ला
श्री लंका – इनकी रचना से प्रेरित


रविंद्र नाथ टैगोर को ब्रिटिश सर्कार द्वारा नाइटहुड (Knighthood) की उपाधि भी दी गयी थी जिसे उन्होंने 1919 में जनरल डायर द्वारा किये गए जलियावाला बाग़ नरसंहार के विरोध में वापस कर दिया था।


25 मार्च 2004 को विश्व भारती विश्वविद्यालय से रविंद्र नाथ टैगोर का नोबेल पुरस्कार चोरी हो गया था जिसपर  एक फिल्म बानी थी “नोबेल चोर” .

 

सी वी रमन


सी वी रमन प्रथम एशियाई एवं भारतीय हैं जिन्हे विज्ञानं के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए नोबेल पुरस्कार मिला है।
इन्हे 1930में रमन इफ़ेक्ट (रमन स्कैटरिंग ) के लिए नोबेल पुरस्कार मिला है।
बाद में सी वी रमन को 1954में भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया है।

मदर टेरेसा

मदर टेरेसा अलबेनियन मूल की भारतीय महिला हैं जिन्हे शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला है।


ये प्रथम भारतीय महिला हैं जिन्हे नोबेल पुरस्कार मिला है।


इनका जन्म 26 अगस्त 1910 तथा मृत्यु 5 सितम्बर 1997 को हुई थी। 

1950 में इन्होने मिशनरी ऑफ़ चैरिटी की स्थापना कोलकाता में की थी।
इनको 1962 में रेमैन मैग्ससे पुरस्कार तथा 1979 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

मदर टेरेसा को भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से 25 जनवरी 1980 को सम्मानित किया गया था।

अमर्त्य सेन

इनका जन्म 3 नवंबर 1933 को हुआ था।
इन्हे 1998 में नोबेल मेमोरियल प्राइज फॉर इकोनॉमिक्स तथा 1999 में भारत सरकार द्वारा भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

कैलाश सत्यार्थी

कैलाश सत्यार्थी को मलाला युसूफ जई के साथ संयुक्त रूप से 2014 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।


इन्हे बच्चों एवं युआवों के हो रहे शोषण के विरुद्ध संघर्ष तथा सभी बच्चों के शिक्षा के अधिकार के लिए  संघर्ष करने के लिए शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।


इन्होनें बहुत सारे सामाजिक संगठनों तथा संस्थाओं की स्थापना की जिनमें से
1. बचपन बचाओ आंदोलन
2. Global March against Child Labour
3. Global campaign for Education
4. Kailash Satyarthi Children Foundation
प्रमुख हैं।


कैलाश सत्यार्थी के द्वारा लिखी गई कुछ पुस्तकें हैं


1. आजाद बचपन की ओर
2. बदलाव के बोल तथा
3. Will for children 

कुछ और भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेताओं की कहानी अगले अंक में।