7 असाधारण व्यक्तित्व जिन्हें पद्म पुरस्कार 2020 से सम्मानित किया गया

पद्मश्री पुरस्कार 2020 से सम्मानित 7 असाधारण व्यक्तित्व

कहते हैं कि असाधारण व्यक्ति जिनके दिल में और कुछ नहीं केवल मानवता बसती हो उन्हें किसी भी पुरस्कार की चिंता नहीं होती। वो निस्वार्थ भावना से लोगों और देश की सेवा करते रहते हैं।
अगर आप मानवता की सेवा के लिए निस्वार्थ भावना के साथ, बिना फल की चिंता किए करते जाते हैं तो फल देने वाला आपकी चिंता करता है।

इसी प्रकार से जब 7 लोगो को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित करने की घोषणा हुई तो ये बात चरितार्थ हो गई।
इन लोगों के बारे में बहुत हीं कम लोगों को और बहुत हीं कम जानकारी थी।

1. जगदीश लाल आहूजा

जगदीश लाल आहूजा को लोग लंगर बाबा के नाम से भी जानते हैं।

जैसे कि नाम से हीं पता चल जाता है, ये पिछले दो दशकों से रोगियों के लिए निस्वार्थ भाव से मुफ्त लंगर का आयोजन करते हैं।

लंगर के साथ साथ ये रोगियों की आर्थिक सहायता भी करते हैं।

2. जावेद अहमद टाक

जावेद अहमद टाक जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में करीब दो दशकों से दिव्यांग बच्चों को समाज के मुख्य धारा में आकर उनकी सेवा कर रहे हैं।

एक आतंकवादी घटना में इनको भी दिव्यांग होना पड़ा था। तब से ये व्हील चेयर पर रहते हैं।

3. मोहम्मद शरीफ उर्फ चचा शरीफ

चचा शरीफ फैजाबाद में एक साइकिल मैकेनिक हैं जो पिछले 25 वर्ष से लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं।

अब तक ये 25000 से अधिक शवों का, उनके धर्म की पहचान करके उनके धार्मिक रीति रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार कर चुके हैं।

लोग इन्हें चचा शरीफ के नाम से भी जानते हैं।

4. तुलसी गौडा

तुलसी गौडा को इनके पौधों के विभिन्न प्रजातियों के बारे में वृहद् रुप से जानकारी के कारण Encyclopaedia of Forest एनसाय्क्लोपेडिया आॅफ फाॅरेस्ट भी कहा जाता है।

पिछले 60 वर्षों से ये हजारो पेड़ों की देखभाल कर चुकी हैं तथा आज भी 72 वर्ष की आयु में भी लोगों के बीच पेड़ पौधों और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य करती हैं।

5. डाॅ सुशोवन बनर्जी

डाॅ सुशोवन बनर्जी को पश्चिम बंगाल के बोलपुर के निवासियों के बीच एक टका डाॅक्टर या One Rupee Doctor के नाम से भी जाना जाता है।

ये पिछले 57 सालों से मरीजों का इलाज उनसे महज एक रुपया लेकर करते आ रहे हैं।
ये पश्चिम बंगाल में कांग्रेस पार्टी के पुर्व विधायक रह चुके हैं।

6. उषा चौमर

अलवर, राजस्थान की रहने वाली उषा चौमर कभी मैला ढोने का काम किया करती थी। आज उन्हें उनके समाज सेवा के कार्यों के लिए पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

उषा चौमर बचपन से हीं मैला ढोने का काम करती थी जो महज दस साल की उम्र में उनकी शादी होने के बाद भी जारी रहा।

उनको ये काम पसंद नहीं होते हुए भी करना पड़ता था। पर वर्ष 2003 में सुलभ इंटरनेशनल के मालिक बिन्देश्वर पाठक से होने के बाद इनके जीवन में बदलाव आया।

बिन्देश्वर पाठक नें इन्हें सही राह दिखाई तथा ये पापड़ और जुट बनाने का कार्य करने लगी जिसमें और भी महिलाओं को जोड़ने का काम भी किया।

2003 में उषा चौमर नई दिशा संस्था से जुड़ी तथा कई महिलाओं के जीवन में बदलाव लाई।

7. हरेकाला हजब्बा

हरेकाला हजब्बा कर्नाटक में दक्षिण कन्नड़ के एक छोटे से गांव न्युपाड़ापु के रहने वाले हैं।

ठेले पर संतरा बेचने वाले हरेकाला हजब्बा के पास रहने के लिए घर नहीं था तथा कभी स्कूल नहीं जा सके पर बच्चों को पढ़ाने के लिए पुरी जिंदगी लगा दी।

वर्ष 2000 तक इनके गांव में कोई स्कूल नहीं था तथा इन्होंने अपने गांव में स्कुल खोला जिसे अब कॉलेज में अपग्रेड करने की कोशिश कर रहे हैं।

आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण पहले एक मस्जिद में स्कुल खोला तथा बाद में गांव वालों के सहयोग से स्कुल खुला।

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