Story behind starting of Nobel Prize

विश्व में किसी बड़े पुरस्कार की बात हो और नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) का नाम ना आये ऐसा नहीं हो सकता.

नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) मानवता की उत्कृष्ट सेवा के लिए उन लोगों को प्रदान किया जाता है जिन लोगो ने

1. फिजिक्स (Physics)

2. केमिस्ट्री (Chemistry)

3. मेडिसिन (Medicine)

4. लिटरेचर (Literature)तथा

5. शांति  (Peace)

के क्षेत्र में मानवता की उत्कृष्ट सेवा की हो.

Pesron behind Nobel Prize

नोबेल पुरस्कार  (Nobel Prize) के पीछे का व्यक्ति

नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) की शुरुआत अल्फ्रेड नोबेल (Alfred Nobel) के द्वारा अपने संपत्ति के उपयोग के लिए लिखी गयी वसीयत से हुई थी.

अल्फ्रेड नोबेल (Alfred Nobel)

अल्फ्रेड नोबेल (Alfred Nobel) स्वीडिश (Swedish) बिजनेसमैन, केमिस्ट, इंजीनियर और आविष्कारक थे जिन्होंने अपने जीवन में बहुत सरे मिलिट्री उपकरणों का अविष्कार किया जिसमे डायनामाइट (Dynamite) सबसे बड़ा अविष्कार है.

इनका जन्म 21 अक्टूबर 1833 को स्वीडन के स्टॉकहोल्म में हुआ था तथा 10 दिसंबर 1896 को सर्नेमो इटली में मृत्यु हो गयी.

अल्फ्रेड नोबेल के विचार Thought of Alfred Nobel

अगर हमारे पास बहुत सारे विचार हैं और उनमे से एक भी सफल हो जाये तो मैं संतुष्ट हो जाऊंगा।

नोबेल पुरस्कार के शुरुआत के पीछे की कहानी

Story behind starting of Nobel Prize

अल्फ्रेड नोबेल के द्वारा नोबेल पुरस्कार के शुरुआत की कहानी बहुत ही प्रेरणादायी और दिलचस्प है.

 

अल्फ्रेड नोबेल ने अपने जीवन में बहुत सरे अविष्कार किये थे जो मानवता के लिए विनाशकारी थे, जिसमे डायनामाइट बहुत बड़ा आविष्कार था.

 

जब 1888 में उनके भाई की मृत्यु हुई तो पेरिस के फ्रेंच अख़बार ने गलती से अल्फ्रेड नोबेल की शोक सन्देश

 प्रकाशित कर दी, उसमे लिखे हुए शब्दों को पढ़कर, उस अख़बार का खुद के प्रति विचार को पढ़कर अल्फ्रेड नोबेल को बहुत धक्का लगा तथा अपने आप पर ग्लानि हुई।  उस ओबिचार्य का शीर्षक था ,

 

“मौत का सौदागर मर गया ” “Mercahnt of Death, Died”

 

इस एक वाकया ने अल्फ्रेड नोबेल की ज़िन्दगी बदल दी। अल्फ्रेड नोबेल को ये मंजूर नहीं था की उन्हें लोग इस तरह से याद करें। उन्हें मानवता के विध्वंशक के रूप में याद किया जाना मंजूर नहीं था।  वो अपने बारे में लोगों के विचार सकारात्मक रखना चाहते थे और इसके लिए कुछ करना चाहते थे।

 

इसके लिए अल्फ्रेड नोबेल ने एक वसीयत लिखी जिसमे उन्होंने लिखा की उनके संपत्ति का 94 % हिस्सा “मानवता के लिए उत्कृष्ट सेवा करने वाले ” लोगों को पुरस्कृत करने के लिए किया जायेगा।

 

इस तरह से एक अख़बार के शोक सन्देश ने अल्फ्रेड नोबेल की ज़िन्दगी बदल दी। और इस तरह से नोबेल पुरस्कार की शुरुआत हो गयी।