भारत में कितने श्रेणी की सुरक्षा मिलती है?पूरी जानकारी हिंदी में। SPG Z +, Z , Y +, Y , X श्रेणी

आज कंगना रानौत को Y+ सुरक्षा मिली है जिसकी चर्चा जोरों पर है। कंगना 61वीं वी आई पी हैं जिसे इस स्तर की सुरक्षा मिली है और वो पहली फिल्म स्टार भी हैं जिन्हें ये सुरक्षा मिली है। इन 61 लोगों में 38 राजनेता तथा 22 गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोग हैं।

इतना जानने के बाद हमारे मन में एक जिज्ञासा अवश्य आती होगी कि आखिर  Y+ सुरक्षा होती क्या है? ये कब और किसको मिलती है? इसमें किस तरह की सुरक्षा होती है? इसका भुगतान कौन करता है? आदि।
आज इस आर्टिकल में हम ना सिर्फ  Y+ सुरक्षा के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे बल्कि हमारे देश में दी जाने वाली हर सुरक्षा की बात करेंगे।
इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपकी सारी जिज्ञासा शांत हो जाएगी।
आप में से बहुत लोग इसके बारे में जानकारी रखते होंगे। पर इस आर्टिकल में आपको कुछ अलग भी मिलेगा।

कंगना रनौत को Y + स्तर की सुरक्षा क्यों मिली?

सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद देश में Social Media से लेकर सड़क पर एक आंदोलन सा छिड़ गया है। लोग सच्चाई जानना चाहते हैं। लोगों के दबाव का नतीजा है की इसकी जाँच CBI को सौंप दी गयी। इसमें कंगना रनौत  बहुत मुखर होकर अपनी बात रख रही है।

इसमें उसने मुंबई पुलिस  की जाँच पर सवाल उठाये जो महाराष्ट्र सरकार में बैठे लोगों को पसंद नहीं आया। इसपर कंगना ने मुंबई में POK (Pakistan Occupied Kashmir ) जैसी स्थिति होने की बात  कही और मुंबई पुलिस पर अविस्वास जताया था। इसपर शिव सेना के संजय राउत ने महाराष्ट्र और मुंबई के अपमान से जोड़ते हुए मुंबई न आने की धमकी दी।

इसके बाद कंगना के तस्वीरों और पोस्टरों पर शिव सेना के महिला कार्यकर्ताओं ने चप्पलों से मारकर विरोध जताया। कंगना ने केंद्र सरकार या हिमाचल प्रदेश की सरकार से सुरक्षा मांगी।

इसके बाद उन्हें केंद्र सरकार द्वारा Y + श्रेणी की सुरक्षा दी गयी।

ये भी पढ़ें

सी बी आई क्या है और कैसे काम करता है? पूरी जानकारी हिंदी में। 

हमारे देश में दी जाने वाली सुरक्षा 

भारत में कुल 6 तरह की सुरक्षा दी जाती है।

#SPG (Special Protection Group)

SPG देश के आधुनिकतम सुरक्षा बल है। इसके सुरक्षा के दायरे में
1. प्रधानमंत्री और उनका परिवार
2. पुर्व प्रधानमंत्री (5 साल के लिए)
3. पुर्व राष्ट्रपति आते हैं।
इसमे सुरक्षाकर्मियों का चयन पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों पारा मिलिट्री फोर्स से किया जाता है।

इनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हथियार 

SPG के जवान अत्याधुनिक हथियारों व सुरक्षा उपकरणों से लैस होते हैं।
इनके पास आटोमेटिक FNF 2000 Assault Rifles तथा Glok 17 पिस्टल होती है।
साथ ही SPG कमांडो  3rd Level Light Weight Bullet Proof Jackets पहनते हैं जिसका वजन मात्र 2.2 किलोग्राम होता है। ये जैकेट 10 मीटर की दुरी से चलाए गए ए के 47 के 7.62 कैलिबर की गोली को झेल सकते हैं।
इसके कमांडो इयर प्लग और वाकी टाकी से भी लैस होते हैं।
इनके जुते विशेष रूप से तैयार होते हैं जो जमीन पर फिसल नहीं सकते।
ये जवान चश्मा पहनते हैं जिसके उनकी आंखें किसी भी तरह के हमलों से बच सकें तथा किसी भी तरह के डिस्ट्रैक्सन से भी बचाव हो सके। 

SPG का गठन 

1981 से पहले प्रधानमंत्री के सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस के स्पेशल ट्रेंड जवानो की होती थी।
अक्टूबर 1981 में IB (Intelligence Beuro ) द्वारा प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया।
अक्टूबर 1984 के बाद इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद ये महसूस किया गया कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक स्पेशल सुरक्षा दस्ता की होनी चाहिए।
18 फरवरी 1985 मे गृह मंत्रालय द्वारा बीरबल नाथ समिति की स्थापना की गई जिसने मार्च 1985 में एक Special Protection Unit (SPU) के गठन की सिफारिश की।
30 मार्च 1985 को भारत के राष्ट्रपति नें कैबिनेट सचिवालय के तहत इस युनिट की स्थापना की जिसे SPG
नाम दिया गया।
SPG कैबिनेट सचिवालय के अंदर काम करता है। इसका प्रमुख डायरेक्टर लेवल का IPS Officer होता है जिसका कार्यकाल 3 वर्षों का होता है।
इसका मुख्यालय नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास में हीं होता है।
ये फोर्स एक डिफेंसिव फोर्स (Defensive Force ) है ना कि अटैकिंग फोर्स (Attacking Force )। इसका मतलब इसकी ट्रेनिंग एक बचाव दल के रूप में होती है न की आक्रमण करने वाले के रूप में।

 Z+ श्रेणी की सुरक्षा

ये एस पी जी सुरक्षा के बाद दुसरे स्तर की सुरक्षा है। आज ये सुरक्षा कुछ खास लोगों को मिली है जिनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा गांधी परिवार शामिल है। 
इसमें 55 अलग अलग सुरक्षा बलों के जवान होते हैं जैसे RPF, ITBP, CRPF लोकल पुलिस आदि। इनमें से 10 NSG (National Security Guard ) भी शामिल होते हैं।
इस स्तर की सुरक्षा में एस्काॅर्ट गाड़ी भी होती है। 

Z श्रेणी की सुरक्षा

इसमें 30 हथियार बंद जवान होते हैं जो मोबाइल सेक्युरिटी तथा आवासीय सेक्युरिटी में बंटे होते हैं।

इस स्तर की सुरक्षा में एस्काॅर्ट गाड़ी भी होती है।

Y+ श्रेणी की सुरक्षा

इस स्तर की सुरक्षा में CRPF के 5 जवान के साथ साथ एक कमांडर भी होते हैं जो कि आवास पर सुरक्षा देते हैं। इसके अलावा 6 Personal Security Officers (PSO) होते हैं जो हमेशा साथ में रहते हैं तथा तीन शिफ्ट के रोटेशनल ड्यूटी पर रहते हैं।
मतलब सुरक्षा मिले व्यक्ति के साथ 24 घंटे दो सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं।
कंगना रानौत 15 Y+ सुरक्षा प्राप्त लोगों में से एक है। ये सुरक्षा देश के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे तथा कानुन मंत्री रविशंकर प्रसाद को भी मिली है।

 Y श्रेणी की सुरक्षा

इस स्तर की सुरक्षा में कुल 8 जवान सुरक्षा ड्यूटी में होते हैं। जिनमें से 4 जवान तथा 1 कमांडर आवास की सुरक्षा मे लगे होते हैं।
3 हथियार बंद जवान 3 अलग अलग शिफ्ट में सुरक्षित व्यक्ति के साथ लगे होते हैं।
इसका मतलब सुरक्षित व्यक्ति की सुरक्षा के लिए 24 घंटे उसके साथ 1 हथियार बंद जवान तैनात रहता है।

 X श्रेणी की सुरक्षा

ये बिल्कुल बेसिक लेवल की सुरक्षा होती है। इसमें तीन सुरक्षा कर्मी तीन शिफ्ट मे काम करते हैं। इसमें आवास पर कोई सुरक्षा नहीं मिलती।
इसमें राज्य की पुलिस भी शामिल होती है।
अब तक अलग अलग स्तर की सुरक्षा करीब 300 लोगों को मिल चुकी है जिसमें हजारों जवान ड्युटी कर रहे हैं।

ये सुरक्षा किसे और कब मिलती हैं।

इस तरह की सुरक्षा दो तरह से मिलती है। पहली आपके पद पर बने रहने के कारण और दुसरा अगर आपके जीवन को खतरा हो और सरकार और सिविल सोसायटी के गणमान्य व्यक्ति हों। 
जब आप सुरक्षा के लिए स्वयं अप्लाई करते हैं या सरकार को ऐसा लगता है तो आपको ये सुरक्षा मिल सकती है। 
पर इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय विभिन्न इंटेलिजेंस एजेंसी जैसे कि IB (Intelligence Beuro ) R&AW (Research and Analysis Wing) के रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद आपको सुरक्षा देने व न देने का निर्णय लेगा।
ये सुरक्षा आपको पुरे देश में या किसी खास क्षेत्र में देना है ये भी डिसाइड किया जाएगा।
इस सुरक्षा के खर्च कौन देगा 
ये सभी सुरक्षा के खर्च का वहन सरकार करती है।  पर सुरक्षा कर्मियों के आवास की व्यवस्था आपको करन होता है।
पुर्व मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम को रिटायर्मेंट के पहले Z+ स्तर की सुरक्षा मिली थी तथा रिटायर्मेंट के बाद Z स्तर की सुरक्षा मिली। रिटायर्मेंट के बाद उन्होंने अपनी सुरक्षा वापस कर दी क्योंकि उन्हें अपने पैतृक घर में शिफ्ट होना था। तथा वहाँ सुरक्षा कर्मियों के आवास की व्यवस्था नहीं थी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी एक मात्र ऐसे शख्स हैं जो अपनी सुरक्षा के खर्च का वहन स्वयं करते हैं।
उम्मीद है आपको हमारे देश में मिलने वाली विभिन्न श्रेणियों की सुरक्षा के बारे में पूरी जानकारी मिली होगी।
ब्लॉग को फॉलो करते रहें। आपको इस तरह की जानकारियाँ हमेशा मिलती रहेंगी।