सी बी आई क्या है और कैसे काम करता है? पूरी जानकारी हिंदी में।

दोस्तों जब से सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या की खबर आयी है तभी से देश में एक उबाल है। लोग ये मानने के लिए तैयार ही नहीं हैं सुशांत सिंह राजपूत जैसे खुशमिजाज, सफल अभिनेता आत्महत्या भी कर सकता है। पहले इसकी जाँच मुंबई पुलिस कर रही थी। फिर सुशांत के पिता ने गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती के खिलाफ पटना में FIR कर दिया। तब से बिहार पुलिस भी जाँच में लग गयी। पर बिहार पुलिस को जाँच कार्य में मुंबई पुलिस का सहयोग नहीं मिला। उलटे बिहार पुलिस के एक तेज तर्रार IPS Officer विनय तिवारी को Quarantine कर दिया गया। 

तब से बिहार और महारष्ट्र पुलिस के बिच विवाद खुल कर सामने आ गया। इधर बिहार सरकार ने CBI Investigation (जाँच) की  सिफारिश कर दी। 

अब प्रश्न ये उठता है की CBI क्या है? CBI जाँच कैसे करती है? CBI की स्थापना कब और कैसे हुई? CBI कब और किसके आदेश पर जाँच कर सकती है? आदि। 

कोशिश  करता हु कि आपके सभी सवालों का जवाब आज इस आर्टिकल में मिल जायेगा। 

CBI Logo

# CBI क्या है?

CBI यानि Central Bureau of Investigation (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) देश की सबसे बड़ी जाँच एजेंसी है। इसके जाँच के दायरे में पहले केवल केंद्र सरकार के कर्मचारी और अधिकारियों के भ्रस्टाचार के  मामले  आते थे। फिर सरकारी उपक्रमों के कर्मचारियों के भ्रष्टाचार के मामले की जाँच भी आने लगे। 

1969 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण (Nationalisation of Banks) के बाद सरकारी बैंक के कर्मचारी और अधिकारी भी CBI के जाँच के दायरे में आ गए। 

संस्थापक महानिदेशक (Founder Director)

CBI  के संस्थापक महानिदेशक D. P. Kohli थे। ये 1 अप्रैल 1963 से 31 मई 1968 तक CBI के निदेशक रहे। इसके पहले 1955 से 1963 तक SPE (Special Police Establishment) के पुलिस महानिरीक्षक रहे। 

इन्हें 1967 में विशिष्ट सेवाओं के लिए पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

#CBI का इतिहास 

1941 में भारत के ब्रिटिश सरकार को दूसरे विश्व युद्ध के दौरान रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच पड़ताल के लिए SPE यानि Special Police Establishment की  स्थापना की। SPE भारत सरकार के आपूर्ति विभाग के साथ मिलकर  कार्य करता था। जो की युद्ध विभाग के अधीन था। 

दूसरे विश्व युद्ध के बाद सरकार को  केंद्र सरकार के कर्मचारियों और अधिकारीयों में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच के लिए एक केंद्रीय जाँच एजेंसी की आवश्यकता महसूस हुई। 

1946 में Delhi Special Police Establishment Act  बना जो गृह मंत्रालय (Home Ministry) के अधीन था। 

इसके अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत केंद्र सरकार के सभी विभाग आते थे।  तथा इसका विस्तार संघ शाषित प्रदेशों (Union Territories) तक भी था। इसका विस्तार सम्बंधित राज्य सरकारों की सहमति से राज्य तक भी हो सकता था। 

1963 में गृह मंत्रालय के 1 अप्रैल 1963 के संकल्प के जरिये Delhi Special Police Establishment को  CBI नाम दिया गया। 

शुरुआत में CBI का कार्य सिर्फ केंद्र सरकार के कर्मचारियों  अधिकारीयों के भ्रष्टाचार के मामले की जाँच करना था। बाद में इसमें सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों  अधिकारीयों के भ्रष्टाचार के मामले की जाँच करने का भी जिम्मा दे दिया गया। 

1965 में CBI को भ्रष्टाचार के अलावा हत्या, अपहरण, आतंकवाद और अन्य विशिष्ट अपराधों के जाँच का भी जिम्मा दे दिया गया। 

1969 में बैंकों के राष्ट्रीयकरण (Nationalisation of Banks) के बाद सरकारी बैंक के कर्मचारी और अधिकारी भी CBI के जाँच के दायरे में आ गए। 

शुरू में CBI में दो विंग काम करते थे। 

  1. सामान्य अपराध विंग (General Offences Wing) जिसके  अंतर्गत सरकारी  अधिकारीयों के साथ साथ सरकारी उपक्रमों में व्याप्त भ्रष्टाचार का जाँच करना था। इसकी शाखा हर राज्य में है। इसका कार्यालय हर राज्य  में है। 
  2. आर्थिक अपराध विंग (Economic Offences Wing) जिसका काम आर्थिक राजकोषीय  उल्लंघन का जाँच करना था। इसका कार्यालय चारो महानगरों (दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई) में है। 

1987 में CBI में दो जाँच विभाग बनाये गए। 

  1. भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (Anti Corruption Division)
  2. विशेष अपराध विभाग (Special Crime Division)
#CBI महानिदेशक (CBI Chief) 

CBI एक महानिदेशक के अधीन काम करती है। जिसकी नियुक्ति प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एक चयन समिति करती है। चयन समिति में दो और सदस्य होते हैं। एक विपक्ष का नेता और दूसरा भारत के मुख्य न्यायाधीश। मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति में सुप्रीम कोर्ट के कोई अन्य न्यायाधीश। 

Lokpal and Lokayukta Act 2013  के आने के पहले CBI के महानिदेशक का चुनाव CVC (Central Vigilance Commission) द्वारा किया जाता था। 

गृह मंत्रालय वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर अधिकारीयों  की एक सूची कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग यानि DOPT यानि Department of Personel and Training को भेजता है। इस सूची को DOPT चयन समिती को भेजता है। उनमे से चयन समिती CBI Director यानि CBI Chief नियुक्त करती है। 

#कार्यकाल

CBI निदेशक का कार्यकाल 2 साल का होता है। 

इसे चयन समिती के फैसले के बगैर सरकार न तो कार्यकाल काम कर सकती है और न ही पद से हटा सकती है। 

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#CBI अधिकारीयों की रैंक CBI Officers Rank 
  1. Director 
  2. Special Director/Additional Director 
  3. Joint Director 
  4. Deputy Inspector General of Police 
  5. Inspector 
  6. Sub Inspector 
  7. Assistant Sub Inspector 
  8. Head Constable 
  9. Constable 

#CBI जाँच कैसे होती है? (CBI Janch Kaise Hoti Hai)

CBI किसी भी मामले की जाँच तीन तरीकों से कर सकती है।

Delhi Special Police Establishment Act का Section 5 CBI को पुरे देश में कहीं भी जाँच करने का पावर देता है। पर उसी Act का Section 6 किसी राज्य में मामलों की जाँच करने के लिए राज्यों की सहमति की बात करता है।

1. मामला अगर केंद्र सरकार में भ्रष्टाचार का है तो केंद्र सरकार मामले की जाँच CBI को सौप सकती है।

मामला अगर राज्य के अंदर का हुआ जिसमे राज्य की पुलिस  अधिकारिता है तब राज्य सरकार केंद्र से CBI जाँच की सिफारिश करेगी तब केंद्र सरकार CBI को जाँच का जिम्मा सौपेगी।

2. राज्य के मामलों में CBI जाँच के लिए राज्य की सहमति आवश्यक है।

ये सहमति भी दो तरह की होती है।

  1. General Consent – ये  राज्य सरकार द्वारा दिया गया स्थायी सहमति है। इसके अनुसार CBI केंद्रीय कर्मचारियों द्वारा किये गए भ्रष्टाचार के मामलों जाँच  कर सकता है। भले ही वो किसी भी राज्य में हों।
  2. Case Specific Consent – ये सहमति राज्य सरकार किसी खास मामलों के जाँच के लिए देती है।

3. अगर सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट को लगता है की किसी खास मामले की जाँच CBI द्वारा की जानी चाहिए तो वो आदेश दे सकता है। इसमें राज्य सरकार के सहमति की आवश्यकता नहीं है।

उम्मीद है आपको CBI के बारे में ये जानकारी अच्छी लगी होगी।

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