अया सोफ़िया (Hagia Sophia) विवाद क्या है और इसे मस्जिद में क्यों बदल दिया गया?

अया सोफ़िया (Hagia Sophia) चर्च से मस्जिद, मस्जिद से म्यूजियम और फिर म्यूजियम से वापस मस्जिद बन गया।

अब आपके मन में कुछ सवाल आ रहे होंगे। जैसे ये अया सोफ़िया (Hagia Sophia) है क्या? ये बना कब? ये मस्जिद में कब और क्यों बदल गया? मस्जिद से म्यूजियम किसने बनाया? फिर अब ऐसा क्या हो गया की वापस मस्जिद बन गया? ये पूरा विवाद है क्या?

आपकी हर जिज्ञासा शांत होगी। धैर्य रखें और आर्टिकल पूरा पढ़ें।

Hagia Sophia Controversy
Hagia Sophia in Istanbul https://www.pexels.com/photo/hagia-sophia-museum-3969150/
अनुक्रम

  • अया सोफ़िया (Hagia Sophia) क्या है और कहाँ है?
  • इसका अर्थ
  • इसका इतिहास
    • चर्च के रूप में।
    • मस्जिद के रूप में।
    • म्यूजियम के रूप में।

हया सोफ़िया (Hagia Sophia) क्या है और कहाँ है?

अया सोफ़िया (Hagia Sophia) तुर्की के राजधानी इस्तांबुल में स्थित एक शानदार और विश्व प्रसिद्द दर्शनीय स्थल (Tourist Destination) है जिसे प्रति वर्ष लाखों लोग देखने विश्व के कोने कोने से आते हैं। जैसे की शीर्षक से ही पता चल रहा होगा की ये रोमन साम्राज्य के समय पहले चर्च के रूप में बना (चर्च में भी पहले Western Orthodox Church फिर बैजंटीन साम्राज्य के समय Estern Orthodox Church) फिर ओट्टोमन साम्राज्य (Ottomon Empire) में मस्जिद के रूप में बदल गया, फिर आधुनिक तुर्की ने निर्माता मुस्तफा कमाल पाशा (Mustafa Kemal Pasha) ने इसे म्यूजियम में बदल दिया।

जब ये बनकर तैयार हुआ  तब ये दुनिया का सबसे बड़ा आतंरिक स्ट्रक्चर वाला ईमारत था। और ये करीब 1000 साल तक विश्व का सबसे बड़ा कैथेड्रल बना रहा।

अया सोफ़िया (Hagia Sophia) का अर्थ Meaning of Hagia Sophia

इसका अर्थ Holy Wisdom या Sacred Truth होता है।

अया सोफ़िया (Hagia Sophia)का इतिहास 

 चर्च के रूप में।

इसका इतिहास शुरू होता है 360  और 415 ईस्वी से। 360 ईस्वी में  रोमन साम्राज्य द्वारा एक चर्च का निर्माण किया जाता है जो की बाद में आग लगने के कारण नष्ट हो जाता।  फिर 415 ईस्वी में दोबारा एक चर्च का निर्माण होता है जो की फिर से से नष्ट हो जाता है।

फिर 537 ईस्वी में सम्राट जस्टिनियन के द्वारा चर्च का निर्माण कराया जाता है जो आज का अया सोफ़िया (Hagia Sophia) है।

उस समय ईसाइयत में दो सेक्ट थे। Eastern Orthodox Church और Western Orthodox Church।

Eastern Orthodox Church का मुख्यालय Constantinopole  आज का इस्तांबुल में थे तथा Western Orthodox Church का मुख्यालय Vatican में था।

अया सोफ़िया (Hagia Sophia) करीब 900 वर्षों तक Eastern Orthodox Church का मुख्यालय  बना रहा।

 मस्जिद के रूप में।

1453 में Constantinopole को ओटोमन साम्राज्य के सुल्तान मेहमत (Sultan Mehmat) द्वारा जीत लिया जाता है। कई दिनों तक तुर्की में और Constantinopole लुटा जाता है। साथ ही अया सोफ़िया (Hagia Sophia) को भी लुटा जाता है, उसे पूरी तरह से बर्बाद नहीं किया जाता है। सुल्तान मेहमत को पता चलता है की इसे जीतने में तुर्क और अरब 900 वर्षों तक नाकाम रहे। वो उस चर्च  में जाता है जिसे ईसाइयत के गौरव के रूप में देखा जाता था। उस ईमारत में जाने के बाद, उसकी बनावट और खूबसूरती देखने के बाद उसे अपने जीत पर और ज्यादा गर्व होता है। उसी समय सुल्तान मेहमत वहाँ नमाज पढता है और चर्च को मस्जिद में बदल देता है।

चर्च को मस्जिद में बदलने के लिए सुल्तान ने ईसाइयत के प्रतिक चिन्हों को ढंक दिया और प्लास्टर करवा दिया। अंदर इस्लामिक प्रतिक चिन्ह बनवाये।

म्यूजियम के रूप में। 

प्रथम विश्वयुद्ध के बीतते बीतते ओटोमन साम्राज्य बिखर गया तथा उसका शाशन समाप्त हो गया।

1922 में आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष तुर्की का निर्माण मुस्तफा कमाल पाशा (Mustefa Kemal Pasha) के नेतृत्व में होता है जिन्हे “अतातुर्क” के नाम से भी जाना जाता है। इन्हे आधुनिक तुर्की का पिता या जनक भी कहा जाता है। अतातुर्क का अर्थ तुर्की का पिता (Father of Turkey) होता है।

जो सम्मान भारत में महात्मा गाँधी को है वही सम्मान तुर्की में मुस्तफा कमाल पाशा (Mustefa Kemal Pasha) को दिया जाता है।

ये आधुनिक और धर्मनिरपेक्ष विचारों के व्यक्ति थे। इनका मकसद तुर्की को एक आधुनिक और धर्मनिरपेक्ष देश बनाना था। ये एक ऐसा तुर्की चाहते थे जिसका कोई राज्य धर्म  न हो,  औरतों और अल्पसंख्यकों को समान अधिकार हो।

1934 में इन्होने अया सोफ़िया (Hagia Sophia) को मस्जिद से  बदलकर म्यूजियम में बदल दिया जिसे

1985 में UNESCO (United Nationa Educational, Scientific and Cultural Organisation) ने World Heritage Site का दर्जा दिया।

1935 में इसे जनता के लिए खोल दिया गया और ये विश्व के सबसे प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों में  से एक बन गया।

2013 में सरकार ने इसके मीनारों को नमाज के लिए खोल दिया।

2016 में 85 वर्षों के बाद पहली बार इसमें  नमाज पढ़ी गयी।

2018 में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) ने खुद वहाँ नमाज पढ़ी और उसे मस्जिद में बदलने की बात की।

2019 में राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) की पार्टी ने इस्तांबुल के स्थानीय चुनाव में ये मुद्दा उठाया पर चुनाव में हार गए।

2020 में ओटोमन साम्राज्य के आक्रमण के 567वें वर्षगांठ के दिन उस म्यूजियम में फिर से नमाज पढ़ी जाती है।

इसके बाद न्यायलय ने Association for the Protection of Historic Monument and the Environment नाम के एक ग्रुप की याचिका पर मस्जिद में बदलने का निर्णय दिया।

अंतत: 24  जुलाई को वहाँ नमाज पढ़ी जाएगी और म्यूजियम मस्जिद बन जायेगा।

तुर्की के इस निर्णय का विरोध 

अया सोफ़िया (Hagia Sophia) 900 वर्षों तक Eastern Orthodox Church का मुख्यालय रहा था।  इससे जुड़े  लोगों के लिए इससे भावनात्मक लगाव है। इसलिए पूरी दुनिया में  जहा इस फेथ से जुड़े लोग हैं इसका विरोध कर रहे हैं।  जैसे Greece, France, Russia, United States of America आदि। साथ ही साथ World Council of Churches और पोप भी इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं।

UNESCO भी अपने World Heritage Committee के नियमों का हवाला देकर विरोध जता रहा है। इस नियम के मुताबिक World Heritage Site में शामिल किसी भी ईमारत का नाम या उपयोग को बदलने के लिए UNESCO के World Heritage Committee का अप्रूवल लेना होता है।

उम्मीद है आप लोग हया सोफ़िया विवाद (Hagia Sophia Controversy) को समझ गए होंगे। इसके बारे में आपकी सारी जिज्ञासा शांत हो गयी होगी। ये जानकारी आपके परीक्षाओं में भी काम आएंगी जैसे UPSC, State PSC इत्यादि।

अगर आप भी इसमें अपना अनुभव जोड़ना चाहते हैं या कुछ और भी लिखने का शौक रखते हैं तो Mail Us at ” [email protected] “साथ में अपना परिचय एक फोटो के साथ भी भेजें। आपकी रचना आपके नाम और फोटो के साथ प्रकाशित की जाएगी।

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