भारत की नई शिक्षा नीति 2020 की संपूर्ण जानकारी हिंदी में

हर देश की एक शिक्षा नीति होती है  जिसपर उस देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था चलती है। हमारे भारत में भी हमेशा से एक नीति रही है शिक्षा की जिसपर हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था चलती रही है। इसमें समय समय पर परिवर्तन भी हुए है। 2020 में भारत सरकार 35 वर्षों से चल रही शिक्षा नीति को समाप्त करके एक नयी शिक्षा नीति लेकर आयी है। ऐसा नहीं है की स्वतंत्रता के बाद की  शिक्षा नीति है। हम अपनी शिक्षा नीति को दो बार पहले भी बदल चुके हैं।

नयी शिक्षा नीति क्या है इसमें  बदलाव हुए हैं? इन सब विषयों पर करेंगे।

टॉपिक्स

  • भारतीय शिक्षा नीति
  • इतिहास
  • घटना क्रम
  • बदलाव की जरुरत क्यों?
  • शिक्षा नीति में बदलाव
  • कन्क्लूसन

भारतीय शिक्षा नीति Indian Education Policy 

हमारे देश की शिक्षा नीति 10 + 2 पैटर्न पर आधारित रही है जिसमे बोर्ड परीक्षाओं में आये grades और numbers पर ज्यादा फोकस किया जाता रहा है। हम Practical Knowledge की जगह Theoretical Knowledge पर ज्यादा ध्यान दिए हैं। पर नयी शिक्षा नीति में Theoretical Knowledge की जगह Practical Knowledge पर ज्यादा ध्यान दिया गया है।

आज़ादी  के बाद भारतीय शिक्षा नीति  का इतिहास History of Indian Education Policy after Independence 

हमारे  देश में अब तक कुल 3 बार शिक्षा नीति लागु हो चुकी है।

1968 में इंदिरा गाँधी प्रधानमंत्री थी  दूसरी बार 1986 में जब राजीव गाँधी प्रधानमंत्री थे। आज़ादी  के बाद से हमारे देश में शिक्षा को नियंत्रित करने के लिए शिक्षा मंत्रालय काम करता था 1986 में बदल कर मानव संशाधन विकास मंत्रालय कर दिया गया।

1992 में 1986 के शिक्षा नीति में कुछ संशोधन किया गया  शिक्षा नीति को बदला नहीं गया।

भारत सरकार ने 1964 में तत्कालीन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission) के अध्यक्ष डॉक्टर दौलत सिंह कोठारी अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया जिसे आयोग कहा। कोठारी आयोग (Kothari Commission) की सिफारिश पर नयी शिक्षा नीति लागु हुई। इसमें आयोग की सभी सिफारिशों को मन लिया गया बस एक को छोड़कर। वो था शिक्षा पर अपने GDP का 6 % खर्च करना।

भारत सरकार के National Education Policy Draft 2019 के अनुसार भारत में 2017 -2018 में हमारे GDP का मात्रा 2.7 % ही शिक्षा पर खर्च हुआ। अब तक कभी भी हमने अपने GDP का 4 % से अधिक शिक्षा पर खर्च नहीं किया।

जबकि कई देश  GDP का 5 -6 % तक खर्च करते हैं शिक्षा पर जैसे भूटान, जिम्बाब्वे, स्वीडन और बाकि और भी कई देश।

 घटना क्रम

नयी शिक्षा नीति का ड्राफ्ट बनकर तैयार हो गया है। इसको कैबिनेट में पास किया जा  चूका है। अब ये लोकसभा और राज्यसभा में पास होने के बाद राष्ट्रपति का हस्ताक्षर होगा। उसके बाद ये लागु होगा।

ये ड्राफ्ट रातों रात बनकर तैयार नहीं हुआ है। इसपर काम बहुत दिनों से चल रहा था। इसका घटनाक्रम इस प्रकार है।

  • 2014 – भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र में शामिल।
  • 2015 – 31 अक्टूबर 2015 को पूर्व कैबिनेट सचिव T. S. R. Subramaniam  की अध्यक्षता में 5 सदस्यों की एक कमिटी का गठन।
  • 2016 – 27 मई 2016 को इस कमिटी ने अपनी रिपोर्ट दी।
  • 2017 – 24 जून 2017 को ISRO (Indian Space Research Organisation) के प्रमुख वैज्ञानिक K Kasturirangan  की अध्यक्षता में 9 सदस्यों की कमिटी को ड्राफ्ट बनाने की जिम्मेदारी दी गयी।
  • 2019 – 31 मई 2019 को इस कमिटी ने Human Resource Minister, रमेश पोखरियाल निशंक को ड्राफ्ट सौंप दिया। इसके बाद HRD मंत्रालय ने इस पर लोगों से सुझाव मांगे। कारोब 2 लाख लोगो ने इस ड्राफ्ट पर सुझाव दिए।
  • 29 जुलाई 2019 को केंद्रीय कैबिनेट ने इस ड्राफ्ट को मंजूरी दी।

बदलाव की जरुरत क्यों?

अब प्रश्न आता है की इस बदलाव की जरुरत क्या थी? केंद्र सरकार के अनुसार हमारी शिक्षा नीति पुरानी हो गयी थी। आज के ज़माने में जिस तरह की शिक्षा की लोगो को जरुरत है वो नहीं मिल पा रही थी। इसमें बदलाव के कई कारण थे।

बदलते समय की जरूरतों को पूरा करना

शिक्षा  की गुणवत्ता को बढ़ाना

Innovation और Research को बढ़ावा देना।

देश को ज्ञान का सुपर पावर बनाना।

सरकार के लक्ष्य

इस नयी नीति के द्वारा सरकार अपने लक्ष्य को प्राप्त करना चाहती है।

Making India a  Global Super Power

2035 तक सरकार कम से कम 50 % विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा तक पहुँचाना चाहती है। अभी ये आंकड़ा 25 – 26 % तक है।

शिक्षा नीति में बदलाव

अब सबसे बड़ा प्रश्न है कि आखिर शिक्षा नीति में बदलाव क्या किया गया है। हमारी शिक्षा नीति को समाप्त करके बिलकुल नयी नयी शिक्षा नीति लाया गया है। इसमें बहुत ही अहम् बदलाव किये गए हैं जो इस प्रकार हैं।

  • सबसे पहले मानव संशाधन विकास मंत्रालय का नाम बदल कर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है। अब मानव संशाधन मंत्रालय को शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जायेगा तथा मानव संशाधन विकास मंत्री को शिक्षा मंत्री के नाम से जाना जायेगा। (अभी मानव संशाधन विक्स मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक हैं।)
  • शिक्षा का बजट बढ़ा दिया गया है। अब पुरे GDP का 6 % शिक्षा पर खर्च किया जायेगा।
  • प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दी जाने की कोशिश की जाएगी।
  • नयी शिक्षा नीति के तहत संस्कृत भाषा को भी बढ़ावा दिया जायेगा। संस्कृत के विश्वविद्यालयों में अलग अलग विषयों की पढाई संस्कृत माध्यम में होगी। 

अब हमारे शिक्षा का तरीका बदल जायेगा।

उच्च शिक्षा में बदलाव
  • Multiple Entry and Multiple Exit System 

अब अगर आप कभी बीच में पढाई छोड़ देते हैं तो जो पढाई अपने की है वो व्यर्थ नहीं जायेगा। अगर स्नातक में अपने 1 साल पढ़ कर छोड़  दिया तो आपको Certificate मिलेगा, 2 साल में Diploma, और 3 साल पूरा कर लिया तो Degree। इसमें Credit Transfer System लागु होगा।

स्नातक की डिग्री 3 साल और 4 साल की होगी। अगर आपको रिसर्च करना होगा तो आपको 4 साल की स्नातक डिग्री लेनी होगी। उसके बाद 1 Post Graduate और 4 साल Phd । M. Phil की डिग्री की आवश्यकता नहीं होगी।

  • Multi-Disciplinary Education System

कोई स्ट्रीम नहीं होगी जिसे Science, Arts और Commerce आदि। आप अपने मनचाहे विषयों की पढाई कर सकेंगे। अगर आपकी रूचि Physics के साथ History पढ़ने की है तो वो भी पढ़ सकते हैं।

ये बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।

  • College में Graded Autonomy होगी। मतलब College अपने स्तर से भी परीक्षा ले सकते हैं और डिग्री भी  दे सकते हैं।
  • College और University में नामांकन के लिए एक Common Admission Test लिया जायेगा।
  • उच्च शिक्षा को विनियमित (Regulate) करने के लिए एक Regulatory Body बनाई जाएगी। जैसे UGC, AICTE आदि अलग अलग Regulatory Body की जगह एक Body होगी।
  • चाहे केंद्रीय, राजकीय या Deemed विश्वविद्यालय हो, सबके लिए एक मानक तय होंगे।
  • निजी कॉलेज के Fee सरकार द्वारा निर्धारित किये जायेंगे और उसकी सीमा बानी रहेगी। अब निजी कॉलेज मनमानी फी नहीं ले सकेंगे।
  • Research की funding के लिए अमेरिका के तर्ज पर एक National Research Foundation बनाया जायेगा जो Science के अलावा Arts के रिसर्च के लिए भी फण्ड देगी।
  • तकनिकी द्वारा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए Virtual Labs शुरू किये जायेंगे।

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स्कूली शिक्षा में बदलाव 

पहले हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था 10 + 2 के पैटर्न की जगह 5 + 3 + 3 + 4 कर दिया गया है।

  • 3 से 6 साल तक के बच्चे के लिए खेल के साथ पढाई का पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। इसके लिए बालवाटिका तैयार किया गया है जिसमे  पढ़ाने के लिए शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।  को ECCE Qualification (Early Childhood Care) कहा जायेगा।
  • कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों के लिखना पढ़ना सिखाने पर खास जोर।
  • छठी कक्षा से  बच्चों को Vocational Courses पढ़ाने की शुरुआत हो जाएगी। बच्चों को Computer Coding के साथ साथ उनकी रूचि वाली Skill सिखाई जाएगी। इसी कक्षा से Internship Programme की भी शुरुआत हो जाएगी। अगर किसी बच्चे को पेंटिंग का शौक है तो उसे किसी पेंटर से पेंटिंग की ट्रेनिंग  दी जाएगी। इसी तरह जिसको संगीत या चित्रकारी का शौक होगा तो उसे उसकी ट्रेनिंग दी जाएगी। 
  • कक्षा 6 से ही Project based learning शुरू हो जाएगी।
  • 9 से 12 कक्षा तक एक समान शिक्षा दी जाएगी। हर विषय गहराई  में पढाई जाएगी।
  • Multi-Stream System लागु होगा। इसमें बच्चे को ये आज़ादी रहेगी अपने पढाई वाले विषयों के साथ Extra Curricular Subject भी पढ़ सकता है। इस Extra Curricular Subject को अब अलग नहीं माना जायेगा। ये भी हर विषय की तरह बराबर महत्व के होंगे।
पाठ्यक्रम में बदलाव 
  • पुरे देश में एक तरह  पाठ्यक्रम होंगे जिसे NCERT द्वारा तैयार किया जायेगा।
  • कक्षा 5 तक बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा देने की कोशिश की जाएगी।

अब बच्चों का मूल्यांकन 360 डिग्री Holistic Report Card के तर्ज पर किया जायेगा। इसमें बच्चों का मूल्यांकन सिर्फ शिक्षक नहीं बल्कि बच्चा खुद भी करेगा और साथ में उसके सहपाठी भी करेंगे।

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नयी नीति लागु कब से होगी?

इस बिल का नाम है National Higher Education Bill जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। अब इसे संसद में पेश किया जायेगा। इसके बाद ये कानून का शक्ल लेगा। फिर राज्य सरकारें अपने अपने राज्यों में इसे कानून बनाकर लागु करेंगी। 

उम्मीद है आपको नए शिक्षा नीति के बारे में पूरी जानकारी मिल  गयी होगी।  अब देश की शिक्षा व्यवस्था ऐसी होगी जिस से अब छात्र कागज की डिग्री की जगह स्किल सीख कर आएंगे और उसको अपने विकास में इस्तेमाल करेंगे। अब जरुरत है इसको सही ढंग से लागु करने की। 

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