शिक्षक दिवस कब और क्यों मनाते हैं? इसके पीछे की कहानी, महत्व आदि

हम प्रति वर्ष बहुत सारे दिवस मनाते हैं। जैसे मदर्स डे, फादर्स डे, फ्रेंडशिप डे इत्यादि। 

साथ हीं हम शिक्षक दिवस यानी टीचर्स डे भी मनाते हैं।
शिक्षक दिवस कब मनाया जाता है इसके बारे में बहुत लोगों को जानकारी होगी।
पर आपके मन में ये सवाल अवश्य आते होंगे कि हम शिक्षक दिवस कब और क्यों मनाते हैं? इसके पीछे की कहानी क्या है?
अगर आपको इसकी जानकारी नहीं है तो आपके लिए ये आर्टिकल कमाल का होने वाला है।
और अगर ये आप जानते हैं तो भी ये आर्टिकल पढें क्योंकि इसमें बहुत सारी ऐसी बातें कवर होंगी जिसे आपको जानना चाहिए।
#शिक्षक दिवस क्या है?
शिक्षक दिवस एक तरीका है जिससे हम अपने जीवन में आए और नहीं भी आए शिक्षकों को सम्मानित करने का।
शिक्षक दिवस मनाना क्यों चाहिए?
सर्वप्रथम हमें ये सोचना चाहिए कि हमें शिक्षक दिवस मनाना क्यों चाहिए? इसकी आवश्यकता क्या है?
हमारे देश और संस्कृति में हम हर उस प्राणी का सम्मान करते हैं जिसने हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रभाव डाला हो। और एक शिक्षक से अधिक सकारात्मक भूमिका हमारे जीवन में कौन अदा कर सकता है?
ये हमारे लिए अपने शिक्षक के सम्मान का तरीका है। इससे हम सिद्ध करना चाहते हैं कि हमारे जीवन में शिक्षक का कितना महत्व है।

#शिक्षक दिवस कब मनाया जाता है।

विश्व के विभिन्न देशों में अलग अलग दिनों को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।

अन्तरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस प्रति वर्ष 5 अक्टूबर को मनाया जाता है।   

भारत में प्रति वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
#शिक्षक दिवस 5 सितंबर को हीं क्यों मनाया जाता है?
प्रति वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं। पर ये सवाल भी वाजिब है कि ऐसा क्यों?  हम 5 सितंबर को हीं शिक्षक दिवस क्यों मनाते हैं।
इसके लिए हमें हमारे प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बारे में जानना पडे़गा। ये एक शिक्षक भी थे।
इनके जन्मदिन के अवसर पर प्रति वर्ष हम शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं।

#शिक्षक दिवस मनाने के पीछे की कहानी।
डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक बहुत हीं गरीब और साधारण परिवार में जन्मे थे। उन्हें अपना जन्मदिन मनाने का ना तो मौका था और ना हीं शौक।
एक बार उपराष्ट्रपति बनने के बाद उनके दोस्तों नें उनसे अपना जन्मदिन मनाने की बात की।
डॉ राधाकृष्णन नें आज तक अपना जन्मदिन मनाया नहीं था। वो एक शिक्षक रह चुके थे और शिक्षक का महत्व उन्हें बेहद अच्छी तरह से पता था।
दोस्तों के आग्रह पर उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो उन्हें बहुत पसंद आएगा।
तभी से 5 सितंबर को प्रति वर्ष शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
#शिक्षक दिवस कैसे मनाया जाता है।
हर देश में शिक्षक दिवस अलग अलग दिनों को और अलग अलग तरीके से मनाया जाता है। कुछ देशों में इस दिन छुट्टी होती है। पर हमारे देश में शिक्षक दिवस के दिन छुट्टी नहीं होती है। पर शिक्षकों को काम नहीं करने दिया जाता है। इस दिन उनको सम्मानित किया जाता है।
विद्यालयों में अलग अलग सांस्कृतिक कार्यक्रम किये जाते हैं। लेखन और पठन की प्रतियोगिता आयोजित की जाती हैं।
शिक्षकों के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
शिक्षक दिवस मनाने का सरकारी तरीका।
सरकार

#शिक्षक दिवस और गुरु पूर्णिमा।
हमारे देश में आजादी के बाद 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाने लगा। तो क्या इसके पहले हम शिक्षकों के सम्मान नहीं करते थे?
ऐसा बिल्कुल नहीं है।
हमारे देश में प्राचीनकाल से हीं जब पुरी दुनिया अभी सभ्यता सीख रही थी हम अपना जीवन में शिक्षा और शिक्षक का महत्व समझ गए थे। हमारे देश व संस्कृति में शिक्षक या गुरु का महत्व भगवान से भी अधिक दिया गया है।
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुदेवोमहेश्वर:
गुरुर्साक्षात परमब्रह्म: तस्मैश्रीगुरुवेनम:।।
मतलब गुरु हीं ब्रह्मा है, गुरु हीं विष्णु हैं, गुरु हीं शिव हैं। गुरु साक्षात ब्रह्म हैं जिन्हें हम नमन करते हैं।
हम प्राचीन काल से ही आषाढ माह की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाते आ रहे हैं।

#शिक्षक दिवस के दिन दिए जाने वाले पुरस्कार।

शिक्षक दिवस के दिन भारत के राष्ट्रपति उत्कृष्ट योगदान के लिए शिक्षकों को सम्मानित करते हैं।

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#डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का संक्षिप्त जीवन परिचय

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्वतंत्र भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति थे। इन्हें 1962 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के कार्यकाल समाप्त होने के बाद राष्ट्रपति भी बनाया गया।
इनका जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुतनी गांव में हुआ था। बेहद गरीब परिवार में जन्मे डॉ राधाकृष्णन एक शिक्षक के रूप में अपना कैरियर शुरू किए। इनका हमारे देश में शिक्षा और राजनीति में बहुत बड़ा योगदान है।
नोट : – डॉ राजेंद्र प्रसाद एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो दो बार राष्ट्रपति पद पर रहे हैं।

जन्म – 5 सितम्बर 1888 की तमिलनाडु के तिरुतनी गाँव में।

आरम्भिक शिक्षा गौड़ी स्कूल और तिरुपति मिशन स्कूल में हुई।

1903 में 16 वर्ष की आयु में ही इनकी शादी शिवकामु से हो गयी।

उच्च शिक्षा मद्रास क्रिस्चियन कॉलेज में हुई।

1916 में दर्शन शास्त्र में एम ए

1916 में ही मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में सहायक प्राध्यापक के रूप में नियुक्ति।

1937 में दर्शन शास्त्र के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया।

1952 में उपराष्ट्रपति

नोट – उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। इसका मतलब जो भी व्यक्ति उपराष्ट्रपति के पद  पर रहेगा वो राज्यसभा का सभापति होगा।

1954 में शिक्षा व राजनीती के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सम्मान से पुरस्कृत किया गया।

1962 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के कार्यकाल समाप्त होने के बाद इन्हे राष्ट्रपति बनाया गया।

1962 से ही प्रति वर्ष 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

नोट – डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति रहे हैं जो दो बार राष्ट्रपति रहे।

17 अप्रैल 1975 में इनका निधन हो गया।

अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस प्रति वर्ष 5 अक्टूबर को मनाया जाता है।

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा लिखी गयी पुस्तकें

  1. Hindu View of life
  2. An idealistic view of life

पुस्तकें वो साधन हैं जिनके माध्यम से हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच पुल का निर्माण कर सकते हैं।

शिक्षण कार्य को एक पेशे के रूप में नहीं बल्कि “जीवन धर्म ” (जीवन जीने का एक तरीका) के रूप में अपनाना चाहिए।

शिक्षकों को उच्च सम्मान देकर भारत पुनः विश्वगुरु की पदवी प्राप्त कर सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

प्रति वर्ष शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या को राष्ट्रपति शिक्षकों को राष्ट्रीय सम्मान से पुरस्कृत करते हैं। इस पुरस्कार द्वारा प्राथमिक विद्यालयों, माध्यमिक विद्यालयों तथा उच्च विद्यालयों के उत्कृष्ट शिक्षकों को पुरस्कृत करके उनका आभार प्रकट किया जाता है।

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