जन्माष्टमी कब और क्यों मनाया जाता है ?

यदा यदा हि धर्मस्य: ग्लानिर्भवति भारत:।

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहं।।

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम

धर्म संस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।।

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भावार्थः जब जब धर्म की हानि होने लगती है और अधर्म धर्म पर हावी होने लगता है, तब तब मैं स्वयं अवतार लेता हूँ, अर्थात् जन्म लेता हूं । सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के संहार और धर्म की पुनःस्थापना के लिए मैं विभिन्न युगों में अवतरित होता हूं ।

इस श्लोक को हम सबने कभी न कभी सुना होगा। याद भले ही न हो, अर्थ की समझ भले ही न हो, पर इस श्लोक को सुनकर मन में जिसकी छवि बनती है उसके बारे में हम कितना जानते हैं? कौन हैं वो?

जी हाँ। सही पहचाना। ये श्लोक महाभारत के युद्ध के मैदान में श्रीमद्भगवत्गीता का उपदेश देते हुए भगवान श्री कृष्णा नें अर्जुन से कहा था।

जैसा कि हम सबको मालूम है कि हमारा देश पर्व त्योहारों का देश है। हम हर छोटी बड़ी बातो में ख़ुशी तलाश लेते है।

हम श्री कृष्णा जन्माष्टमी पर्व की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बहुत धूम धाम से हम ये पर्व मनाते हैं।

पर क्या आपको पता है जन्माष्टमी पर्व क्यों मनाया जाता  है ? जाहिर सी बात है अधिकतर लोगों को पता होगा। जैसे की नाम से ही स्पष्ट है “श्री कृष्णा जन्माष्टमी (Shree Krishna Janmashtami)” भगवान श्री कृष्णा से ही सम्बंधित होगा।

इस article में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में बहुत जानकारियाँ  मिलने वाली है। जैसे हम जन्माष्टमी कैसे मनाते हैं, किन किन जगहों पर किस किस तरह से मनाया जाता है, जन्माष्टमी का महत्व, क्या celebration करते हैं हम इस दिन?

  • जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है?
  • जन्माष्टमी कब मनाई जाती है?
  • 2020 में  जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी?
  • जन्माष्टमी कैसे मनाई जाती है?
  • दही हांड़ी महोत्सव (Dahi Handi Mahotsav)
  • जन्माष्टमी के पीछे की कहानी (Story behind Janmashtami)
  • जन्माष्टमी के अलग अलग नाम।

“हम श्री कृष्णा जन्माष्टमी (Shree Krishna Janmashtami)” क्यों मनाते है ? Why Shree Krishna Jnamashtami is Celebrated ?

जब पुरे पृथ्वी पर राक्षसों का अत्याचार बढ़ गया था, लोग त्राहि त्राहि कर रहे थे, कंस के क्रूरता से पृथ्वी कराह रही थी तब भगवान विष्णु नें मनुष्य रूप में अवतार लेकर पृथ्वी को राक्षसों के जुल्म से मुक्त करने का निर्णय लिया। फिर कंस द्वारा जेल में बंदी बनाये उसी की बहन देवकी और वासुदेव के बेटे के रूप में भाद्रपद कृष्णा पक्ष अष्टमी के दिन मथुरा में अवतार लिया। फिर भगवन श्री कृष्ण ने दुष्ट राक्षसों का संहार करके पृथ्वी को बचाया। क्योंकि उस दिन भगवान का अवतार हुआ था इसलिए हजारों वर्षों से हम श्री कृष्ण जन्माष्टमी बहुत ही धूम धाम  खुशी से मनाते हैं।

जन्माष्टमी कब मनाई जाती है? When Janmashtami is Celebrated?

प्रत्येक वर्ष भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष के अष्टमी (आठवें दिन) को बड़े ही धूम धाम से जन्माष्टमी मनाया जाता है। आज के ही दिन भगवान श्री कृष्ण का अवतार हुआ था।

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  • 2020 में  जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी? When Janmashtami will be Celebrated in 2020?

जन्माष्टमी 2020

11 अगस्त

निशिथ पूजा– 00:04 से 00:48

पारण– 11:15 (12 अगस्त) के बाद

रोहिणी समाप्त- रोहिणी नक्षत्र रहित जन्माष्टमी

अष्टमी तिथि आरंभ – 09:06 (11 अगस्त)

अष्टमी तिथि समाप्त – 11:15 (12 अगस्त)

जन्माष्टमी कैसे मनाई जाती है? How Janmashtami is Celebrated?

हिन्दू धर्म में जन्माष्टमी बड़े ही धूम धाम से मनाई जाती है। इस दिन लोग भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस के रूप में मनाते हैं। भारत के साथ साथ विदेशो में रहने वाले  हिन्दू भी जन्माष्टमी के त्यौहार को उल्लास और भक्ति के साथ मनाते हैं। इसे धार्मिक तरीकों के साथ ही साथ एक जन्मदिन की तरह भी मनाया जाता है।  

जन्माष्टमी के दिन लोग घर में और मंदिरों में श्रद्धा भाव से पूजा पाठ करते हैं। भगवन श्री कृष्ण को लड्डू आदि का भोग लगाते हैं। भगवान श्री कृष्ण  की नगरी मथुरा में लोग बहुत दूर दूर से  आते हैं और श्रद्धा से अपने आराध्य की आराधना करते हैं। लोग जन्माष्टमी के दिन व्रत या उपवास (Fasting) भी रखते हैं। लड्डू गोपाल (लड्डू गोपाल भगवान श्री कृष्ण का ही एक नाम है) की मूर्ति को झूला झुलाया जाता है और भजन भी गया जाता है।

जन्माष्टमी के दिन स्कूल कॉलेज में श्री कृष्ण सम्बंधित फैंसी ड्रेस कम्पटीशन (Fancy Dress Competition) के साथ ही साथ नाट्य नाटिका और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है।

दही हांड़ी महोत्सव (Dahi Handi Mahotsav)

इस दिन युवा  दही हांड़ी (Dahi Handi) का कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं। दही हांड़ी में युवा दही से भरी हांड़ी को ऊँचाई पर तंग देते हैं फिर एक के ऊपर एक चढ़कर, एक पिरामिड बनाकर दही से भरी हांड़ी को फोड़ते हैं। इस आयोजन का युवाओ में बहुत उत्साह होता है। युवाओं की टोली इसकी प्रतियोगिता रखती है और जितने वाले को पुरष्कार भी दिया जाता है।

जन्माष्टमी के पीछे की कहानी (Story behind Janmashtami)

जब पृथ्वी पर कंस का अत्याचार  बढ़ गया था, लोग त्राहि त्राहि कर रहे थे तब कंस की बहन देवकी के गर्भ से कृष्णा का देवकी के आठवें पुत्र के रूप में जन्म हुआ। कंस को मालूम था की देवकी का आठवां पुत्र  उसका वध करेगा इसलिए उसने देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया था तथा देवकी के सभी पुत्रों को मार देता था।

जब कृष्ण का जन्म हुआ तब आँधी तूफान का कहर मच गया,  घनघोर अँधेरा छा गया, मूसलाधार बारिश होने लगी, कारागार के सभी पहरेदार बेहोश हो गए, यमुना नदी उफान मारने लगी।

वासुदेव एक टोकरी में लेकर बाल कृष्ण को कंस से बचाने के लिए यमुना पर कर अपने मित्र नन्द के पास गए। वहां कृष्ण का पालन पोषण नन्द और यशोदा  द्वारा किया गया। इसीलिए कृष्णा का एक नाम नन्दलाल भी है।

बचपन से ही भगवन श्री कृष्ण ने कंस द्वारा  भेजे गए हर राक्षस राक्षसी का संहार किया और अंत में कंस का संहार करके लोगो को कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई।

जन्माष्टमी के अलग अलग नाम (Different names of Janmashtami)

कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami)

कृष्णाष्टमी (Krishnashtami)

गोकुलाष्टमी (Gokulashtami)

कन्हैया अष्टमी (Kanhaiyashtami)

कन्हैया आठें (Kanhaiya Athe)

श्री कृष्ण जयंती (Shree Krishna Jayanti)

श्रीजी जयंती (Shreeji Jayanti)

पूरी पृथ्वी को कंस जैसे क्रूर राक्षस अत्याचारों मुक्ति दिलाने और ब्रह्माण्ड के कल्याण हेतु भाद्रपद के कृष्ण पक्ष के अष्टमी को भगवान श्री कृष्ण का अवतार हुआ। इसीलिए प्रति वर्ष भाद्रपद के कृष्ण पक्ष के अष्टमी के दिन हम सभी भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं।

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